सरकारी एससी/एसटी कर्मचारियों को महाराष्ट्र सरकार निकालेगी, जानें क्यों

देवेंद्र फणनवीस

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फर्जी अनुसूचित जाति और जनजाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने नौकरी से निकाल देने का आदेश महाराष्ट्र सरकार को दिया है। यह आदेश मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस की सरकार के लिए कड़वाहट बन गया है क्योंकि ११,७०० लोगों ने फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की है।

इनमें से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पिछले दो दशकों से काम कर रहे हैं। इसी वजह से सरकार को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करे। इस बात का सभी को ज्ञान है कि सरकारी नौकरियों के लिए अमूमन धोखाधड़ी की जाती है। महाराष्ट्र में सामने आई यह जालसाजी अधिकारियों के लिए आंखे खोलने वाली है।

फर्जी नोकरी पाने वालों की इतनी बड़ी संख्या होने की वजह से इस धोखधड़ी ने सरकार के सामने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अमल में लाने के लिए दुविधा खड़ी कर दी है। सरकार खुद को कर्मचारियों के गुस्से से बचाना चाहती है। अगर उसने इतने सारे लोगों को एक साथ निकाल दिया तो यह एक बार में इतने सारे सरकारी कर्मचारियों को निकालने का सबसे बड़ा मामला होगा।

फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले ज्यादातर कर्मचारियों ने खुद को अनुसूचित जनजाति का बताया है। क्लर्क से नौकरी की शुरुआत करने वाले बहुत से लोग अब सरकार में डिप्टी सचिव के पद तक पहुंच चुके हैं। यदि यह लोग अपनी सुरक्षित नौकरियों से हाथ धोते हैं तो राजनीतिक दलों और यूनियन के खिलाफ रैली निकालेंगे।

जुलाई २०१७ में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जो कोई भी फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए नौकरी पाने के दोषी पाए जाएंगे उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

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